
मैं एक माँ हूँ।
एक महिला हूँ।
और सबसे पहले एक इंसान हूँ।
आज का समाज बाहर से जितना चमकता दिखता है,
अंदर से उतना ही उलझा हुआ नज़र आता है।

एक माँ होने के नाते मैं हर दिन अपने बच्चों के भविष्य को लेकर सोचती हूँ—
कि हम उन्हें किस तरह का समाज सौंप रहे हैं।
आज का समाज – दिखावा और हकीकत
आज की दुनिया में सच बोलना आसान नहीं रहा।
जो सही होता है, वही अक्सर दबा दिया जाता है।
और जो गलत होता है, वही ताकतवर बनकर सामने आता है।
समाज में शोर बहुत है,
लेकिन सच्चाई की आवाज़ कहीं खो जाती है।
एक महिला की चुप्पी क्यों तोड़ी जानी चाहिए
एक महिला होने के नाते मैंने यह भी महसूस किया है कि
हमसे उम्मीद की जाती है कि हम हर हाल में चुप रहें,
समझौता करें,
और सब कुछ सहन करती रहें।
चुप रहना समाधान नहीं
मैं मानती हूँ कि
चुप रहना अब समाधान नहीं है।
समाज तभी बदलेगा
जब माँ, महिला और आम इंसान
अपनी आवाज़ को पहचानेंगे और उठाएंगे।
यह प्लेटफॉर्म क्यों शुरू किया
यह प्लेटफॉर्म उसी सोच का हिस्सा है—
जहाँ सच बोला जाएगा
जहाँ समाज की हकीकत सामने रखी जाएगी
जहाँ किसी एक की नहीं, बल्कि सबकी बात होगी
यह सिर्फ़ खबरों की वेबसाइट नहीं है।
यह एक कोशिश है—
एक बेहतर सोच, बेहतर समाज और सच्ची आवाज़ की ओर।






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