Insaniyat kyaa hoti hain janiye
कहने को तो मनुष्ययोनि में जन्म लेने वाला हर कोई इंसान ही कहलाता है, लेकिन असल में इंसान कहलाने का सही हक़दार वही है, जिसमें इंसानियत ज़िंदा है. इंसानियत को मापने का कोई मीटर नहीं बना. यही कारण है कि हर कोई अपने आप को अच्छा ही दिखाने की कोशिश करता है. वह जानता है, यहां जो दिखता है वही लोग मानते हैं.
दूसरों की खुशी का ख़्याल रखना .
जो मतलबी इंसान होते हैं उनके लिए खुद की खुशी से ज़्यादा और कुछ मायने नहीं रखता. अपनी खुशी के बाद वे औरों का सोचते हैं. लेकिन वहीं कुछ लोग ऐसे होते हैं जो खुद से ज़्यादा औरों की खुशी देख कर खुश होते हैं.
इसके लिए अगर इन्हें अपनी कोई इच्छा दबानी भी पड़ती है तो इसका उन्हें ग़म नहीं होता. कई बार जो सुकून हमें ढेरों रुपयों में नहीं मिलता वो सामने वाले की एक मुस्कुराहट में मिल जाता है. अगर आप में भी ऐसी ही आदत है तो इसे हमेशा बनाए रखिए.
जानवरों के प्रति संवेदनशील होना
जिस इंसान के भीतर संवेदना होती है वह दुनिया के सभी जीव जंतुओं की पीड़ा को समान मानता है. लेकिन दुखद यही है कि ऐसा भाव बहुत कम लोगों में होता है. किसी जानवर को तड़पता देख कर लोग ये सोच कर बगल से गुज़र जाते हैं कि इसे कौन सा दर्द हो रहा होगा. जबकि पीड़ा उनको भी उतनी ही होती है जितनी चोट लगने पर इंसान को होती है. लेकिन कुछ लोग होते हैं, जो जानवरों की पीड़ा को भी महसूस कर लेते हैं.
यह बात उन पर लागू नहीं होती जो केवल अपने पालतू जानवरों के प्रति ऐसी भावना रखते हैं. असल इंसानियत तो उनमें होती है जो राह चलते किसी जानवर को तड़पता देख कर उसकी मदद करने का प्रयास करते हैं. अगर आप में भी ऐसी आदत है तो जान जाइए कि इंसानियत का एक और गुण आपके अंदर मौजूद है.
बच्चों को देख कर होते हैं खुश
कहने को तो बहुत लोग कहते हैं कि उन्हें बच्चों से प्यार है लेकिन असल में बच्चों की शरारतों से वे बहुत जल्दी तंग हो जाते हैं. जबकि बच्चों की खूबसूरती में एक बड़ा हाथ उनकी शरारतों का होता है.
ऐसे में, जो लोग सच में बच्चों की खुशी चाहते हैं वो उनकी शरारतों पर चिढ़ते नहीं बल्कि उसका आनंद लेते हैं. बच्चों को गोद में लेना, उनके साथ खेलना और उन्हें खुश रखना इंसानियत की एक बड़ी पहचान है.






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